Class 10th Biology Chapter 1 Subjective
Biology ( जीव विज्ञान )
Class 10th Chapter 1
जैव प्रक्रम
लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर
इस पोस्ट में आपको Biology Chapter 1 के जितने भी प्रश्न उत्तर and Objective होंगे उन्हें इस पोस्ट में आसान भाषा में लिखा गया है So आप बहुत ही ध्यानपूर्वक इन सभी Question को याद और कॉपी में जरुर लिखें
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. वैसे पौधे जो पोषण के लिए सड़ी-गली चीजों पर आश्रित रहते हैं, वे क्या कहलाते हैं?
(क) परजीवी
(ख) मृतजीवी
(ग) स्वपोषी
(घ) परपोषी
उत्तर: (ख) मृतजीवी
2. स्वपोषी भोजन के लिए आवश्यक है
(क) क्लोरोफिल
(ख) सूर्य-प्रकाश
(ग) H2O एवं CO2
(घ) इनमें सभी
उत्तर: (घ) इनमें सभी
3. इनमें कौन प्रकाशसंश्लेषी अंगक है?
(क) हरितलवक
(ख) पत्ती
(ग) स्टोमाटा
(घ) जड़
उत्तर: (क) हरितलवक
4. वायुमंडल में CO2 का कितना प्रतिशत है?
(क) 0.3%
(ख) 0.03%
(ग) 0.003%
(घ) 0.21%
उत्तर: (ख) 0.03%
5. प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रम में निम्नांकित में क्या नहीं होता है?
(क) पानी का टूटना
(ख) CO2 का मुक्त होना
(ग) ऑक्सीजन का मुक्त होना
(घ) CO2 का उपयोग होना
उत्तर: (ख) CO2 का मुक्त होना
6. इनमें किसके द्वारा अमीबा भोजन का अंतर्ग्रहण करता है?
(क) कूटपाद
(ख) परिवहन
(ग) भोजन-रसधानी
(घ) केंद्रक
उत्तर: (क) कूटपाद
7. इनमें से किस छिद्र के द्वारा ग्रसनी ग्रासनली से जुड़ा होता है?
(क) निगलद्वार
(ख) कंठद्वार
(ग) मलद्वार
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर: (क) निगलद्वार
8. ग्रहणी भाग है
(क) मुखगुहा का
(ख) आमाशय का
(ग) छोटी आँत का
(घ) बड़ी आँत का
उत्तर: (ग) छोटी आँत का
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
1. स्वपोषी पौधों में …………………. करने की क्षमता होती है।
2. सौर ऊर्जा का परिवर्तन प्रकाशसंश्लेषण में ……………. ऊर्जा में होता है।
3. वायुमंडल से पत्तियाँ CO2 ……………. द्वारा ग्रहण करती हैं।
4. वे सारी क्रियाएँ जिसके द्वारा जीवों का अनुरक्षण होता है, ……………… कहलाती हैं।
5. सूर्य के प्रकाश को ……………….. अवशोषित करता है।
6. मनुष्य के आहारनाल की लंबाई करीब ……………. मीटर तक की होती है।
7. मनुष्य की आमाशय की दीवार से …………… नामक स्त्राव निकलता है।
8. छोटी आँत की ग्रंथियों से निकलनेवाला रस ……………….. कहलाता है।
उत्तर :- 1. प्रकाशसंश्लेषण 2. रासायनिक 3. स्टोमाटा (रंध्र) 4. जैव प्रक्रम 5. क्लोरोफिल 6. 8 से 10 7. जठर रस 8. आंत्र रस (सक्कस एंटेरिकस)
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (20-30 शब्दों में उत्तर)
1. जैव प्रक्रम किसे कहते हैं?
उत्तर :- वे सभी शारीरिक क्रियाएँ जिनके द्वारा जीवों के शरीर का अनुरक्षण, मरम्मत और रक्षा होती है, जैव प्रक्रम कहलाती हैं; जैसे— पोषण, श्वसन, और उत्सर्जन।
2. बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता विसरण द्वारा क्यों नहीं पूरी हो पाती है?
उत्तर :- बहुकोशिकीय जीवों का शरीर बड़ा और जटिल होता है। इनकी सभी कोशिकाएँ सीधे पर्यावरण के संपर्क में नहीं होती हैं, इसलिए साधारण विसरण द्वारा पूरे शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती।
3. जीवों में पोषण की प्रमुख दो विधियाँ कौन-कौन-सी हैं?
उत्तर :- जीवों में पोषण की दो मुख्य विधियाँ हैं:
(i) स्वपोषण— जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
(ii) परपोषण— जिसमें जीव भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
4. हरे पौधों में किस प्रकार का पोषण पाया जाता है?
उत्तर :- हरे पौधों में स्वपोषण (Autotrophic Nutrition) पाया जाता है। वे सूर्य के प्रकाश, क्लोरोफिल, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से प्रकाशसंश्लेषण प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
5. जंतुओं में पोषण की कौन-सी विधि पाई जाती है?
उत्तर :- जंतुओं में परपोषण (Heterotrophic Nutrition) पाया जाता है। जंतु अपने भोजन का निर्माण स्वयं नहीं कर सकते, इसलिए वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों और अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
6. तीन प्रकार की परपोषण विधियों के नाम लिखें।
उत्तर :- परपोषण की तीन मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:
(i) मृतजीवी पोषण (Saprophytic)
(ii) परजीवी पोषण (Parasitic)
(iii) प्राणीसम पोषण (Holozoic)
7. संपूर्ण प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखें।
उत्तर :- प्रकाशसंश्लेषण का रासायनिक समीकरण:
6CO₂ + 12H₂O –(सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल)–> C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O
इसमें ग्लूकोज, जल और ऑक्सीजन उपोत्पाद के रूप में बनते हैं।
8. प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया में उपोत्पाद के रूप में क्या बनता है?
उत्तर :- प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया में मुख्य उत्पाद के रूप में ग्लूकोज बनता है, जबकि उपोत्पाद (by-product) के रूप में ऑक्सीजन (O₂) गैस और जल का निर्माण होता है।
9. प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया हरितलवक या क्लोरोप्लास्ट में ही क्यों होती है?
उत्तर :- हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट) के अंदर हरे रंग का वर्णक ‘क्लोरोफिल’ मौजूद होता है। क्लोरोफिल ही सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करने में सक्षम होता है, इसलिए यह प्रक्रिया केवल हरितलवक में होती है।
10. प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रिया के लिए किन-किन पदार्थों की आवश्यकता होती है?
उत्तर :- प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रिया संपन्न करने के लिए मुख्यतः चार पदार्थों की आवश्यकता होती है:
(i) पर्णहरित (क्लोरोफिल)
(ii) कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
(iii) जल एवं खनिज लवण
(iv) सूर्य का प्रकाश
11. प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रिया के लिए पौधे CO₂ कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर :- पौधे प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) सीधे वायुमंडल से प्राप्त करते हैं। यह गैस पत्तियों की सतह पर मौजूद सूक्ष्म छिद्रों (स्टोमाटा या रंध्र) के माध्यम से प्रवेश करती है।
12. कवक एवं जीवाणुओं में प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया क्यों नहीं हो पाती है?
उत्तर :- कवक और जीवाणुओं की कोशिकाओं में प्रकाशसंश्लेषी वर्णक यानी क्लोरोफिल (हरितलवक) अनुपस्थित होता है। क्लोरोफिल न होने के कारण वे सौर ऊर्जा को अवशोषित कर भोजन बनाने में असमर्थ होते हैं।
13. पोषण के दृष्टिकोण से अमीबा तथा पैरामीशियम किस प्रकार के जंतु हैं?
उत्तर :- पोषण के दृष्टिकोण से अमीबा और पैरामीशियम दोनों ही एककोशिकीय प्राणीसमभोजी (Holozoic) जंतु हैं। ये ठोस या द्रव के रूप में अन्य जीवों एवं जैविक पदार्थों का अंतर्ग्रहण करते हैं।
14. मनुष्य का आहारनाल कौन-कौन-से मुख्य भागों में बँटा होता है?
उत्तर :- मनुष्य का आहारनाल एक लंबी कुंडलित नली है, जो मुख्य रूप से मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, मलाशय और मलद्वार में बँटी होती है।
15. ग्रसनी में स्थित दो छिद्रों के नाम लिखें।
उत्तर :- मनुष्य की ग्रसनी में दो प्रमुख छिद्र स्थित होते हैं:
(i) निगलद्वार— जो आहारनाल के अगले भाग यानी ग्रासनली में खुलता है।
(ii) कंठद्वार— जो श्वास नली में खुलता है।
16. मनुष्य में पाचन आहारनाल के किस भाग से शुरू होता है?
उत्तर :- मनुष्य में भोजन का पाचन मुखगुहा (Mouth cavity) से ही शुरू हो जाता है। यहाँ लार में मौजूद टायलिन (एमाइलेज) एंजाइम कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) को पचाने का कार्य प्रारंभ करता है।
17. मनुष्य के आहारनाल के किस भाग में पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है?
उत्तर :- पचे हुए भोजन का अवशोषण मनुष्य के आहारनाल के छोटी आँत (Small Intestine) वाले भाग में होता है। छोटी आँत के इलियम हिस्से में स्थित ‘रसांकुर’ (Villi) भोजन को अवशोषित करते हैं।
18. क्लोरोफिल वर्णक कहाँ पाया जाता है?
उत्तर :- क्लोरोफिल वर्णक हरे पौधों की पत्तियों एवं तनों की कोशिकाओं में स्थित हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट) के अंदर पाया जाता है। यह पौधों को हरा रंग प्रदान करता है और प्रकाश अवशोषित करता है।
19. प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रम द्वारा पौधे क्या निर्माण करते हैं?
उत्तर :- प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रम के द्वारा पौधे सूर्य-प्रकाश की उपस्थिति में जल और CO₂ का उपयोग करके कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करते हैं, जो उनके पोषण का मुख्य स्रोत है।
20. मृतजीवी को क्या कहा जाता है?
उत्तर :- मृतजीवी को ‘अपघटक’ (Decomposer) भी कहा जाता है, क्योंकि ये सड़े-गले मृत पेड़-पौधों और जंतुओं के अवशेषों को अपघटित करके सरल कार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं और पर्यावरण साफ रखते हैं।
21. जिस जीव के शरीर से परजीवी अपना भोजन प्राप्त करते हैं, वे क्या कहलाते हैं?
उत्तर :- जिस जीव के शरीर पर रहकर या अंदर रहकर परजीवी अपना भोजन और आश्रय प्राप्त करते हैं, उस जीव को ‘पोषी’ (Host) कहा जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (50-60 शब्दों में उत्तर)
1. जीवों के लिए पोषण क्यों अनिवार्य है?
उत्तर :- जीवों के लिए पोषण अत्यंत अनिवार्य है क्योंकि यह जीवन की विभिन्न जैविक क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। पोषण से शरीर की वृद्धि, विकास और कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत होती है। इसके अलावा, यह जीवों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है तथा शरीर के सही संचालन और अनुरक्षण के लिए आवश्यक तत्व प्रदान करता है।
2. पोषण की परिभाषा लिखें।
उत्तर :- पोषण वह जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव वातावरण से पोषक तत्वों (जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज) को ग्रहण करते हैं तथा उनका उपयोग शरीर की वृद्धि, टूट-फूट की मरम्मत और विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त करने हेतु करते हैं। पोषण के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं— स्वपोषण और परपोषण।
3. स्वपोषण में किन-किन परिस्थितियों का होना आवश्यक है? इसके उपोत्पाद क्या हैं?
उत्तर :- स्वपोषण प्रक्रिया के लिए चार मुख्य परिस्थितियों का होना आवश्यक है:
(i) पर्णहरित (क्लोरोफिल),
(ii) कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂),
(iii) जल एवं खनिज लवण,
(iv) सूर्य का प्रकाश। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप पौधे भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं तथा उपोत्पाद (by-product) के रूप में ऑक्सीजन (O₂) गैस और जल का निर्माण कर वायुमंडल में मुक्त करते हैं।
4. परपोषण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- परपोषण पोषण की वह विधि है जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकते, बल्कि भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जीवों (पौधों या जंतुओं) पर निर्भर रहते हैं। ऐसे जीवों को परपोषी कहा जाता है। मानव, सभी जंतु, कवक और अधिकांश जीवाणु परपोषण विधि द्वारा ही अपना पोषण प्राप्त करते हैं।
5. मृतजीवी पोषण किसे कहते हैं?
उत्तर :- मृतजीवी पोषण परपोषण की वह विधि है जिसमें जीव अपना भोजन सड़े-गले मृत जंतुओं, पेड़-पौधों तथा कार्बनिक पदार्थों से अपने शरीर की सतह से घुलित कार्बनिक पदार्थों के रूप में अवशोषित करते हैं। ऐसे जीवों को मृतजीवी या अपघटक (जैसे— कवक, मशरूम, और जीवाणु) कहा जाता है, जो पर्यावरण की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
6. परजीवी पोषण क्या है?
उत्तर :- परजीवी पोषण परपोषण की वह विधि है जिसमें कोई जीव किसी दूसरे जीव (पोषी/Host) के शरीर पर या उसके अंदर रहकर, बिना उसे मारे, उससे अपना भोजन एवं आश्रय प्राप्त करता है। भोजन प्राप्त करने वाले जीव को परजीवी कहते हैं। उदाहरण के लिए— अमरबेल, फीताकृमी, गोलकृमि, जू और खटमल इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
7. प्राणिसमपोषी जीव किसे कहते हैं?
उत्तर :- वे जीव जो अपना भोजन ठोस या द्रव के रूप में, जंतुओं के भोजन ग्रहण करने की विधि की तरह, अपने शरीर के अंदर अंतर्ग्रहण (Ingestion) करके प्राप्त करते हैं, प्राणिसमपोषी (Holozoic) जीव कहलाते हैं। इन जीवों में भोजन का पाचन और अवशोषण शरीर के भीतर होता है; जैसे— मनुष्य, अमीबा, मेढक और कुत्ता।
8. प्रकाशसंश्लेषण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- प्रकाशसंश्लेषण वह जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में, वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) तथा जल (H₂O) ग्रहण करके कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन (O₂) गैस उपोत्पाद के रूप में बाहर निकलती है, जो पृथ्वी पर जीवन के संतुलन के लिए आवश्यक है।
9. पत्तियों को प्रकाशसंश्लेषी अंग क्यों कहा जाता है?
उत्तर :- पत्तियों की कोशिकाओं में अत्यधिक मात्रा में हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट) पाए जाते हैं, जिनमें प्रकाशसंश्लेषी वर्णक ‘क्लोरोफिल’ मौजूद होता है। क्लोरोफिल ही सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को ग्रहण करने में सक्षम होता है। इसके अलावा पत्तियों में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन के आदान-प्रदान के लिए सूक्ष्म छिद्र (स्टोमाटा) होते हैं, इसलिए पत्तियों को प्रकाशसंश्लेषी अंग कहा जाता है।
10. भोजन के पाचन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- भोजन का पाचन वह भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा भोजन के जटिल, अघुलनशील और बड़े अणुओं को एंजाइमों की सहायता से सरल, घुलनशील और अवशोषण योग्य छोटे अणुओं में तोड़ा जाता है। इससे शरीर की कोशिकाएँ भोजन के पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित कर ऊर्जा प्राप्त कर पाती हैं। मनुष्य में पाचन प्रक्रिया मुखगुहा से शुरू होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. पोषण किसे कहते हैं? जीवों में होनेवाली विभिन्न पोषण विधियों का उल्लेख करें।
उत्तर :- वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जीव पोषक तत्वों को ग्रहण कर उनका उपयोग शरीर की वृद्धि, मरम्मत और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए करते हैं, पोषण कहलाती है।
पोषण की मुख्य विधियाँ:
स्वपोषण (Autotrophic) :- इसमें जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। जैसे— हरे पौधे, जो प्रकाशसंश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।
परपोषण (Heterotrophic) :- इसमें जीव भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। इसके तीन प्रकार हैं:
मृतजीवी पोषण :- सड़े-गले पदार्थों से भोजन अवशोषित करना (जैसे— कवक, मशरूम)।
परजीवी पोषण :- दूसरे जीव के शरीर पर रहकर बिना मारे भोजन प्राप्त करना (जैसे— अमरबेल, फीताकृमि)।
प्राणीसम पोषण :- ठोस या द्रव रूप में भोजन ग्रहण करना (जैसे— मनुष्य, अमीबा)।
2. प्रकाशसंश्लेषण-प्रक्रिया को संक्षेप में समझाएँ।
उत्तर :- हरे पौधे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में वायुमंडल से CO_2 तथा जल (H_2 O) लेकर ग्लूकोज (भोजन) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन (O_2) गैस बाहर निकालते हैं। इसी प्रक्रिया को प्रकाशसंश्लेषण कहते हैं।
रासायनिक समीकरण:
6CO2+12H2O → (“क्लोरोफिल” ) ┴ (“सूर्य-प्रकाश” ) C6H12O6+6O2+6H2 O
इसके 4 मुख्य घटक हैं:
(i) क्लोरोफिल,
(ii) सूर्य का प्रकाश,
(iii) कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2),
(iv) जल।
प्रक्रिया: पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल सौर ऊर्जा को सोखता है। यह ऊर्जा जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ती है। अंत में CO2 से मिलकर ग्लूकोज बनता है।
3. एक प्रयोग द्वारा दर्शाएँ कि प्रकाशसंश्लेषण के लिए क्लोरोफिल आवश्यक है।
उत्तर :- एक चित्तीदार (कोलियस या क्रोटन) पत्ती वाला पौधा लें। इसे 2 दिन अंधेरे में रखें ताकि पत्ती स्टार्च-मुक्त हो जाए।
अब इसे 3-4 घंटे धूप में रखें। पत्ती को तोड़कर इसके हरे और सफेद भागों को कागज पर चिन्हित कर लें।
पत्ती को पहले उबलते पानी में और फिर अल्कोहल में रखकर तब तक उबालें जब तक वह रंगहीन न हो जाए।
पत्ती को धोकर उस पर आयोडीन की कुछ बूँदें डालें।
परिणाम: पत्ती का केवल वही भाग नीला-काला होता है जो पहले हरा था। सफेद भाग पर आयोडीन का कोई असर नहीं होता।
निष्कर्ष: नीला-काला रंग स्टार्च की उपस्थिति को दिखाता है। इससे सिद्ध होता है कि प्रकाशसंश्लेषण केवल हरे (क्लोरोफिल वाले) भाग में होता है।
4. प्रकाशसंश्लेषण के लिए CO_2 आवश्यक है, इसे साबित करने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।
उत्तर :- प्रयोग (मोल का प्रयोग):
गमले वाले पौधे को 2 दिन अंधेरे में रखकर स्टार्च-मुक्त कर लें।
एक चौड़े मुँह की काँच की बोतल में थोड़ा KOH (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड) का घोल डालें। (KOH अंदर की CO_2 सोख लेता है।)
पौधे की एक पत्ती का आधा भाग बोतल के अंदर डालकर कॉर्क से बंद कर दें और आधा भाग बाहर रहने दें।
इस उपकरण को 3-4 घंटे धूप में रखें।
पत्ती को तोड़कर अल्कोहल में उबालें और धोकर आयोडीन घोल डालें।
परिणाम: पत्ती का बाहर वाला भाग नीला-काला हो जाता है, लेकिन बोतल के अंदर वाला भाग नीला-काला नहीं होता।
निष्कर्ष: बोतल के अंदर CO_2 न होने से प्रकाशसंश्लेषण नहीं हुआ। अतः प्रकाशसंश्लेषण के लिए CO_2 अति आवश्यक है।
5. अमीबा का भोजन क्या है? अमीबा में पोषण का वर्णन करें।
उत्तर :- अमीबा का भोजन: शैवाल के छोटे टुकड़े, बैक्टीरिया, डायटम और सूक्ष्म कार्बनिक कण हैं।
अमीबा में पोषण के चरण:
अंतर्ग्रहण :- अमीबा का कोई निश्चित मुख नहीं होता। जब भोजन इसके पास आता है, तो यह कूटपाद (Pseudopodia) बनाकर भोजन को घेर लेता है और ‘भोजन-रसधानी’ बनाता है।
पाचन :- भोजन-रसधानी के अंदर पाचक एंजाइम भोजन को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं।
अवशोषण एवं स्वांगीकरण :- पचा हुआ भोजन सीधे कोशिकाद्रव्य में विसरित होकर ऊर्जा और वृद्धि में इस्तेमाल होता है।
बहिष्करण :- अपचित भोजन शरीर की सतह पर बने अस्थायी छिद्र द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।
6. मनुष्य के आहारनाल की रचना का वर्णन करें।
उत्तर :- मनुष्य का आहारनाल लगभग 8 से 10 मीटर लंबी एक कुंडलित नली है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
मुखगुहा :- इसमें दाँत (चबाने के लिए), जीभ (स्वाद के लिए) और लार ग्रंथियाँ होती हैं।
ग्रसनी एवं ग्रासनली :- भोजन को मुखगुहा से आमाशय तक पहुँचाने का मार्ग।
आमाशय :- यह ‘J’ आकार की थैली है, जहाँ जठर रस (HCl, पेप्सिन) स्रावित होता है।
छोटी आँत :- यह सबसे लंबा भाग (लगभग 6 मीटर) है। इसके तीन भाग (ग्रहणी, जेजुनम, इलियम) हैं। यहाँ पाचन पूर्ण होता है।
बड़ी आँत :- यह जल का अवशोषण करती है।
मलाशय एवं मलद्वार :- अपचित भोजन यहाँ से बाहर निकलता है।
7. मनुष्य के आहारनाल में पाचन की क्रिया का वर्णन करें।
उत्तर :- मनुष्य में पाचन क्रिया मुख से शुरू होकर छोटी आँत में पूरी होती है:
मुखगुहा में :- दाँत भोजन को पीसते हैं और लार में मौजूद ‘टायलिन’ एंजाइम स्टार्च को शर्करा में बदलता है।
आमाशय में :- जठर रस का HCl भोजन को अम्लीय बनाता है और पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन को पचाता है।
छोटी आँत में (पूर्ण पाचन):
पित्त रस :- वसा को पचाने योग्य बनाता है।
अग्न्याशयी एवं आंत्र रस :- प्रोटीन को अमीनो अम्ल में, कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में और वसा को वसीय अम्ल में बदलते हैं।
अवशोषण :- छोटी आँत के रसांकुर (Villi) पचे भोजन को सोखकर रक्त में मिला देते हैं।
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