Class 10th History Chapter 4 Subjective

Class 10th History Chapter 4 Subjective Question || भारत में राष्ट्रवाद लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर

Class 10th History Chapter 4 Subjective

History ( इतिहास )         Bihar Board

Class 10th                Chapter 4

Book  Subjective  Question

भारत में राष्ट्रवाद

इस पोस्ट में इतिहास अध्याय 4 के बुक से जितने भी Objective, Subjective और Fill In The Blanks दिए गए है उनका 100% Right और सबसे आसान भाषा के साथ उत्तर दिया गया है आप चाहे तो बुक से भी मिला कर पढ़ सकते है

 

History Chapter 4 Notes :- Click Here 

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न 
1. गदर पार्टी की स्थापना किसने और कब की? 
(क) गुरदयाल सिंह, 1916 
(ख) चन्द्रशेखर आजाद, 1920 
(ग) लाला हरदयाल, 1913 
(घ) सोहन सिंह भाखना, 1918
सही उत्तर: (ग) लाला हरदयाल, 1913

2. जालियाँवाला बाग हत्याकांड किस तिथि को हुआ? 
(क) 13 अप्रैल 1919 ई० 
(ख) 14 अप्रैल 1919 ई० 
(ग) 15 अप्रैल 1919 ई० 
(घ) 16 अप्रैल 1919 ई०
सही उत्तर: (क) 13 अप्रैल 1919 ई०

3. लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ? 
(क) 1916 
(ख) 1918 
(ग) 1920 
(घ) 1922
सही उत्तर: (क) 1916

4. असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव काँग्रेस के किस अधिवेशन में पारित हुआ? 
(क) सितम्बर 1920, कलकत्ता 
(ख) अक्टूबर 1920, अहमदाबाद 
(ग) नवम्बर 1920, फैजपुर 
(घ) दिसम्बर 1920, नागपुर
सही उत्तर: (क) सितम्बर 1920, कलकत्ता

5. भारत में खिलाफत आंदोलन कब और किस देश के शासक के समर्थन में शुरू हुआ? 
(क) 1920 तुर्की 
(ख) 1920 अरब 
(ग) 1920 फ्रांस 
(घ) 1920 जर्मनी
सही उत्तर: (क) 1920 तुर्की

6. सविनय अवज्ञा आंदोलन कब और किस यात्रा से शुरू हुआ? 
(क) 1920 भुज 
(ख) 1930 अहमदाबाद 
(ग) 1930 दांडी 
(घ) 1930 एल्बा
सही उत्तर: (ग) 1930 दांडी

7. पूर्ण स्वराज्य की माँग का प्रस्ताव काँग्रेस के किस वार्षिक अधिवेशन में पारित हुआ? 
(क) 1929 लाहौर 
(ख) 1931 कराँची 
(ग) 1933 कलकत्ता 
(घ) 1937 बेलगाँव
सही उत्तर: (क) 1929 लाहौर

8. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कब और किसने की? 
(क) 1923, गुरु गोलवलकर 
(ख) 1925, के० बी० हेडगेवार 
(ग) 1926, चितरंजन दास 
(घ) 1928 लालचंद
सही उत्तर: (ख) 1925, के० बी० हेडगेवार

9. बल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि किस किसान आंदोलन के दौरान दी गई? 
(क) बारदोली 
(ख) अहमदाबाद 
(ग) खेड़ा 
(घ) चंपारण
सही उत्तर: (क) बारदोली

10. रम्पा विद्रोह कब हुआ? 
(क) 1916 
(ख) 1917 
(ग) 1918 
(घ) 1919
सही उत्तर: (क) 1916

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)
1. बाल गंगाधर तिलक और ……………. ने होमरूल लीग आन्दोलन को शुरू किया।
2. ………….. भारत में खिलाफत आन्दोलन के नेता थे।
3. ……. फरवरी ………. को …………… आन्दोलन स्थगित हो गया। 
4. साइमन कमीशन के अध्यक्ष …………… थे।
5. …………. में ………….. (कृषि कर) कर के विरोध में आन्दोलन आरंभ हुआ।
6. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के पहले अध्यक्ष ………………… थे।
7. ………. अप्रैल ………… को अखिल भारतीय किसान सभा का गठन लखनऊ में हुआ।
8. ………… में ………… में खोंड विद्रोह हुआ।

उत्तर :- 1. एनी बेसेंट 2. महात्मा गांधी 3. 12 फरवरी 1922 को असहयोग 4. सर जॉन साइमन 5. बारदोली में लगान (कृषि कर) 6. व्योमेश चन्द्र बनर्जी 7. 11 अप्रैल 1936 8. 1914 में खोंड

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर ( लगभग 20-30 शब्दों में उत्तर दें )

1. खिलाफत आन्दोलन क्यों हुआ?
उत्तर :- प्रथम विश्वयुद्ध में तुर्की की हार के बाद ब्रिटिश सरकार ने वहाँ के खलीफा (इस्लामी जगत के धार्मिक प्रमुख) के अधिकार छीन लिए। इसी के विरोध में भारतीय मुसलमानों ने तुर्की के खलीफा के सम्मान और पद की पुनर्स्थापना के लिए खिलाफत आंदोलन शुरू किया।

2. रॉलेट एक्ट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित यह एक दमनकारी कानून था, जिसके तहत सरकार किसी भी भारतीय को बिना मुकदमा चलाए सीधे जेल में बंद कर सकती थी। इसे भारतीयों ने ‘काला कानून’ कहा क्योंकि इसमें न कोई अपील, न कोई दलील और न कोई वकील की व्यवस्था थी।

3. दांडी यात्रा का क्या उद्देश्य था?
उत्तर :- 12 मार्च 1930 को गांधीजी द्वारा शुरू की गई दांडी यात्रा का मुख्य उद्देश्य साबरमती से दांडी पहुंचकर समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के दमनकारी नमक कानून को तोड़ना और सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत करना था।

4. गाँधी इरविन पैक्ट अथवा दिल्ली समझौता क्या था?
उत्तर :- 5 मार्च 1931 को महात्मा गांधी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच एक समझौता हुआ, जिसे दिल्ली समझौता भी कहते हैं। इसके तहत गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करना और दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।

5. चम्पारण सत्याग्रह का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :- 1917 में बिहार के चम्पारण में नील उत्पादक किसानों को ब्रिटिश बागान मालिकों द्वारा जबरन ‘तिनकठिया व्यवस्था’ (3/20 भाग पर नील की खेती) के तहत शोषित किया जा रहा था। महात्मा गांधी ने वहाँ पहुंचकर सफल सत्याग्रह किया और किसानों को इस क्रूर व्यवस्था से मुक्ति दिलाई।

6. मेरठ षड्यंत्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- मार्च 1929 में ब्रिटिश सरकार ने देश में बढ़ रहे वामपंथी और श्रमिक आंदोलनों को दबाने के लिए 31 कम्युनिस्ट और मजदूर नेताओं को बंदी बना लिया और उन पर मेरठ लाकर राजद्रोह का मुकदमा चलाया। इसी ऐतिहासिक मुकदमे को मेरठ षड्यंत्र केस कहा जाता है।

7. जतरा भगत के बारे में आप क्या जानते हैं, संक्षेप में लिखें।
उत्तर :- जतरा भगत छोटानागपुर क्षेत्र के उराँव आदिवासियों के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने 1914 में ‘ताना भगत आंदोलन’ की शुरुआत की। उन्होंने आदिवासियों में सामाजिक सुधारों, मद्यपान निषेध और ब्रिटिश सरकार को कर न देने की नीति का प्रचार किया।

8. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना क्यों हुई?
उत्तर :- मजदूरों और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने, उनके शोषण को रोकने तथा उनके राजनीतिक-आर्थिक हितों को संगठित मंच प्रदान करने के उद्देश्य से 31 अक्टूबर 1920 को लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की स्थापना की गई थी।

सुमेलित करें (Match the Following)
(i) गाँधीवादी चरण → (ख) 1919-47
(ii) चौरी-चौरा हत्याकांड → (क) 5 फरवरी, 1922
(iii) हिन्दू महासभा → (च) मदन मोहन मालवीय (स्थापना वर्ष: (ग) 1915)
(iv) बंगाल विभाजन वापस → (ङ) 1911
(v) मोपला विद्रोह → (घ) केरल

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर ( लगभग 60-70 शब्दों में उत्तर दें )

1. असहयोग आन्दोलन प्रथम जन आंदोलन था कैसे?
उत्तर :- असहयोग आंदोलन (1920-22) से पहले के आंदोलन मुख्य रूप से बुद्धिजीवियों और शहरी मध्यम वर्ग तक ही सीमित थे। गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में देश के इतिहास में पहली बार शहरी मध्यम वर्ग के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों, मजदूरों, दस्तकारों, महिलाओं और छात्रों ने व्यापक पैमाने पर भाग लिया। समाज के हर तबके और धर्म के लोगों की इस अभूतपूर्व और सक्रिय भागीदारी के कारण ही इसे भारत का प्रथम ‘जन आंदोलन’ कहा जाता है।

2. सविनय अवज्ञा आंदोलन के क्या परिणाम हुए?
उत्तर :- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हुए:
इसने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ देश में राष्ट्रवाद की एक अभूतपूर्व लहर पैदा की और लोगों के मन से अंग्रेजी हुकूमत का डर हमेशा के लिए निकाल दिया।
आंदोलन में महिलाओं ने पहली बार बड़ी संख्या में घर से बाहर निकलकर धरने और प्रदर्शनों में सक्रिय भाग लिया।
ब्रिटिश सरकार को भारतीयों के व्यापक जन-असंतोष के सामने झुकना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 1931 में ‘गांधी-इरविन समझौता’ हुआ और गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस को बराबरी का स्थान मिला।
इसने भारत में ब्रिटिश वस्तुओं और वस्त्रों के आयात को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाया और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा दिया।

3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई?
उत्तर :- 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में अंग्रेजी शासन के शोषण, भेदभावपूर्ण नीतियों (जैसे आर्म्स एक्ट और वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट) और दमन के कारण जनता तथा पढ़े-लिखे भारतीयों में तीव्र असंतोष था। इस राजनीतिक चेतना को एक अखिल भारतीय मंच देने के उद्देश्य से एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी ए. ओ. ह्यूम के प्रयासों से 28 दिसंबर 1885 को मुंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। इसके गठन का मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय जनता की माँगों और समस्याओं को ब्रिटिश सरकार के सामने रखना था।

4. बिहार के किसान आंदोलन पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर :- बिहार में किसान आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत गौरवशाली हिस्सा रहा है। 1917 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुआ ‘चम्पारण सत्याग्रह’ इसकी पहली मजबूत कड़ी था, जिसने तिनकठिया जैसी दमनकारी व्यवस्था को समाप्त किया। इसके बाद 1920-30 के दशक में बिहार के किसानों को संगठित करने में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने 1929 में ‘बिहार प्रांतीय किसान सभा’ की स्थापना की। जमींदारों के अत्याचारों और लगान माफी के मुद्दों को लेकर बिहार के किसानों का यह संघर्ष आगे चलकर देशव्यापी किसान आंदोलनों का मुख्य आधार बना।

5. स्वराज पार्टी की स्थापना एवं उद्देश्य की विवेचना करें।
उत्तर :- 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन अचानक स्थगित कर देने से कांग्रेस के भीतर काफी निराशा फैल गई थी। इस परिस्थिति में चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने जनवरी 1923 में ‘स्वराज पार्टी’ की स्थापना की।
मुख्य उद्देश्य: स्वराज पार्टी का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के नीतिगत कार्यों में अड़ंगा लगाना था। वे काउंसिल (विधान परिषदों) के चुनावों में भाग लेकर सरकारी व्यवस्था के भीतर प्रवेश करना चाहते थे ताकि काउंसिल के अंदर बैठकर ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों का तीव्र विरोध किया जा सके और भारत के लिए स्वशासन की माँग को मजबूती से उठाया जा सके।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर ( लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें )

1. प्रथम विश्व युद्ध का भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के साथ अंतर्संबंधों की विवेचना करें।
उत्तर :- प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) ने भारत में एक नई आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पैदा की, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को तीव्र गति प्रदान की। इसके अंतर्संबंधों को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

(i) आर्थिक संकट और जन-असंतोष :- युद्ध के खर्चों को पूरा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने भारत में भारी टैक्स बढ़ा दिए, सीमा शुल्क बढ़ा दिया और आयकर (Income Tax) लागू कर दिया। इसके अतिरिक्त, आवश्यक वस्तुओं की कीमतें दोगुनी हो गईं, जिससे आम जनता, किसानों और व्यापारियों में अंग्रेजों के खिलाफ गहरा असंतोष फैल गया।

(ii) जबरन भर्ती :- ग्रामीण इलाकों से युवाओं को ब्रिटिश सेना में जबरन भर्ती किया गया, जिससे गांवों में भारी गुस्सा था।

(iii) वैश्विक घटनाओं का प्रभाव :- युद्ध के दौरान 1917 की रूसी क्रांति की सफलता ने भारतीय राष्ट्रवादियों को बड़े जन आंदोलन के लिए प्रेरित किया। तुर्की के प्रति अंग्रेजों की कठोर नीति के कारण भारत में खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ, जिसने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया।

(iv) तिलक और एनी बेसेंट के प्रयास :- युद्धकाल में ही ‘होमरूल लीग आंदोलन’ चला, जिसने जनता में स्वशासन की भावना जगाई।
निष्कर्ष: इस प्रकार, प्रथम विश्व युद्ध ने भारतीय जनता के कष्टों को बढ़ाकर उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा से जोड़ दिया।

2. असहयोग आंदोलन के कारण एवं परिणाम का वर्णन करें।
उत्तर :- महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920 में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन भारत का पहला राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन था।
आंदोलन के प्रमुख कारण:

(i) रॉलेट एक्ट (1919) :- ब्रिटिश सरकार ने बिना किसी मुकदमे के भारतीयों को जेल भेजने वाला ‘काला कानून’ पास किया, जिससे जनता में भारी आक्रोश था।

(ii) जलियाँवाला बाग हत्याकांड :- 13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर द्वारा निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाई गईं। इस क्रूरता ने गांधीजी का अंग्रेजों के न्याय से विश्वास उठा दिया।

(iii) खिलाफत आंदोलन :- तुर्की के खलीफा के अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए शुरू हुए इस आंदोलन को गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए समर्थन दिया।

आंदोलन के प्रमुख परिणाम:

(i) अभूतपूर्व जन भागीदारी :- पहली बार देश के किसान, मजदूर, छात्र, महिलाएँ और व्यापारी एक साथ सड़कों पर उतरे। राष्ट्रीय आंदोलन मध्यम वर्ग से निकलकर गांवों तक पहुँच गया।

(ii) अंग्रेजों के मन में भय :- इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दीं और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से ब्रिटिश व्यापार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

(iii) राजनैतिक चेतना :- 1922 में चौरी-चौरा कांड के कारण गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया, लेकिन इसने जनता के भीतर आजादी की भावना और निर्भीकता को हमेशा के लिए स्थापित कर दिया।

3. सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर :- 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ सविनय अवज्ञा आंदोलन ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष था। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

(i) साइमन कमीशन का विरोध (1928) :- ब्रिटिश सरकार ने भारत के संवैधानिक सुधारों के लिए एक आयोग भेजा, जिसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। इसके राष्ट्रव्यापी विरोध ने जनता को एकजुट किया।

(ii) नेहरू रिपोर्ट की उपेक्षा :- कांग्रेस द्वारा तैयार की गई ‘नेहरू रिपोर्ट’ में डोमिनियन स्टेटस की माँग की गई थी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने 1929 के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया।

(iii) विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929-30) :- आर्थिक मंदी के कारण भारत के किसानों की फसल की कीमतें आधी रह गईं, लेकिन सरकार ने लगान कम करने से मना कर दिया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भारी असंतोष था।

(iv) गांधीजी की 11 सूत्री माँगें :- गांधीजी ने वायसराय लॉर्ड इरविन के सामने लगान में कमी, नमक कर की समाप्ति और राजनीतिक बंदियों की रिहाई जैसी 11 माँगें रखीं। इरविन द्वारा इन माँगों को ठुकराए जाने के बाद गांधीजी ने दांडी यात्रा शुरू कर नमक कानून तोड़ा और आंदोलन का शंखनाद किया।

4. भारत में मजदूर आन्दोलन के विकास का वर्णन करें।
उत्तर :- भारत में मजदूर आंदोलन का विकास सीधे तौर पर औद्योगिक क्रांति, वामपंथ के प्रसार और राष्ट्रीय आंदोलन की कूटनीति से जुड़ा हुआ था।

(i) प्रारंभिक चरण (19वीं सदी का उत्तरार्ध) :- भारत में सूती वस्त्र और जूट मिलों की स्थापना के साथ ही मजदूरों का शोषण शुरू हो गया। शुरुआती दौर में काम के घंटे तय करने और मजदूरी बढ़ाने के लिए छिटपुट हड़तालें हुईं, लेकिन कोई मजबूत संगठन नहीं था।

(ii) प्रथम विश्व युद्ध के बाद तेजी :- विश्व युद्ध के बाद महंगाई चरम पर पहुँच गई, लेकिन मजदूरों के वेतन में वृद्धि नहीं हुई। इसी समय 1917 की रूसी क्रांति से प्रभावित होकर मजदूरों में अपने अधिकारों के प्रति चेतना जागी।

(iii) AITUC की स्थापना (1920) :- 31 अक्टूबर 1920 को लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में ‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ (AITUC) की स्थापना हुई। इसके बाद मजदूर आंदोलन सुनियोजित तरीके से राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बन गया।

(iv) वामपंथ का प्रभाव :- 1920-30 के दशक में कम्युनिस्टों ने मजदूर संगठनों पर मजबूत पकड़ बनाई। सरकार ने इन्हें दबाने के लिए ‘मेरठ षड्यंत्र केस’ (1929) चलाया, लेकिन मजदूर आंदोलनों की धार कमजोर नहीं हुई। इन आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को एक मजबूत सामाजिक आधार प्रदान किया।

5. भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में गाँधीजी के योगदान की विवेचना करें।
उत्तर :- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान सर्वोपरि है। 1919 से 1947 तक के काल को भारतीय इतिहास में ‘गाँधी युग’ के नाम से जाना जाता है। उनके मुख्य योगदान निम्नलिखित हैं:

(i) सत्याग्रह और अहिंसा का हथियार :- गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका के सफल प्रयोग के बाद भारत आकर चम्पारण (1917), खेड़ा और अहमदाबाद में सत्य तथा अहिंसा पर आधारित सत्याग्रहों का सफल नेतृत्व किया।

(ii) आंदोलन को ‘जन आंदोलन’ बनाना :- गांधीजी से पहले कांग्रेस मुख्य रूप से पढ़े-लिखे शहरी वर्ग तक सीमित थी। गांधीजी ने अपनी सरल जीवन शैली, खादी और आम भाषा के प्रयोग से करोड़ों गरीब किसानों, मजदूरों, महिलाओं और अछूतों को स्वतंत्रता संग्राम की मुख्यधारा से जोड़ दिया।

(iii) तीन बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन :- उन्होंने ब्रिटिश सत्ता की नींव हिलाने के लिए तीन ऐतिहासिक आंदोलन चलाए—असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942)।

(iv) सामाजिक सुधार :- उन्होंने न केवल आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि छुआछूत के खिलाफ संघर्ष (हरिजन उत्थान), हिंदू-मुस्लिम एकता, महिला सशक्तिकरण और कुटीर उद्योगों (चरखा) को बढ़ावा देकर देश का सामाजिक पुनरुत्थान भी किया।

6. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वामपंथियों की भूमिका को रेखांकित करें।
उत्तर :- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वामपंथियों (साम्यवादियों और समाजवादियों) ने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई वैचारिक दिशा और क्रांतिकारी धार दी। उनकी भूमिका को निम्नलिखित रूपों में रेखांकित किया जा सकता है:
(i) मजदूरों और किसानों का संगठन :- वामपंथियों का मानना था कि असली आजादी तभी मिलेगी जब देश के शोषित वर्ग को अधिकार मिलेंगे। उन्होंने पूरे देश में मजदूर यूनियनों और किसान सभाओं (जैसे अखिल भारतीय किसान सभा, 1936) का गठन किया और उनके आर्थिक मुद्दों को राष्ट्रीय आंदोलन के एजेंडे में शामिल करवाया।

(ii) ‘पूर्ण स्वराज’ की प्रारंभिक माँग :- 1920 के दशक में जब कांग्रेस डोमिनियन स्टेटस की बात कर रही थी, तब वामपंथी नेताओं (जैसे हसरत मोहानी, एम. एन. राय) ने पूर्ण स्वतंत्रता की वकालत की। आगे चलकर कांग्रेस के भीतर जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं पर समाजवाद का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसके कारण 1929 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया।

(iii) क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को समर्थन :- भगत सिंह और उनके साथियों ने ‘हिुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) बनाकर वामपंथी सिद्धांतों को अपनाया।

(iv) दमन का सामना :- ब्रिटिश सरकार वामपंथ से इतनी डरी हुई थी कि उसने पेशावर, कानपुर और मेरठ षड्यंत्र जैसे मुकदमों के जरिए इन्हें कुचलना चाहा, लेकिन वामपंथियों ने जेल में रहकर भी राष्ट्रवाद की अलख जगाए रखी।

 

Most Important Link :- 

Telegram Link Click Here 
YouTube Link  Click Here 
Latest Update  Click Here 
Online Test Link  Click Here 
What’s Group Link   Click Here 
Class 10th History Chapter 4 Subjective Question, class 10th history chapter 4 objective question, history class 10th chapter 4 objective question, class 10 history chapter 4 subjective questions, class 12 history chapter 4 subjective questions, class 10th history chapter 4 question answer, sst class 10 history chapter 4 objective question, history class 10th chapter 4 objective, class 10th hsitory chapter 4 question answer, class 12 history chapter 4 subjective 2026, class 10th history chapter 4, bihar board class 10th history chapter 4 question answer, bihar board class 10 history chapter 4 objective, bihar board class 10 history chapter 4 question answer, class 10 history chapter 4 subjective questions, class 10 history chapter 4 bihar board, history class 10 chapter 4 bihar board, bihar board class 10 history chapter 4, sst class 10 history chapter 4 objective question, class 10th bihar board history chapter 4 question answer, bihar board class 10th history chapter 4 question answer, class 10th sst chapter 4 objective question bihar board, 4.भारत में राष्ट्रवाद #1 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर, 4.भारत में राष्ट्रवाद #2 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर, 1.यूरोप में राष्ट्रवाद लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर, यूरोप में राष्ट्रवाद दीर्घ उत्तरीय प्रश्न, यूरोप में राष्ट्रवाद पाठ का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर, भारत में राष्ट्रवाद प्रश्न उत्तर, भारत में राष्ट्रवाद पाठ के प्रश्न उत्तर, भारत में राष्ट्रवाद का उदय एवं विकास, भारत में राष्ट्रवाद का उदय एवं विकास कक्षा 8, महत्वपूर्ण प्रश्न भारत में राष्ट्रवाद का
उदय, भारत में राष्ट्रवाद का अति उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page